(N/A) संपोषी व्यतिकरण:
जब दो तरंगें एक बिंदु पर अध्यारोपित होती हैं,तो संपोषी व्यतिकरण तब होता है जब वे समान कला में होती हैं। यह तब होता है जब तरंगों के बीच का पथ अंतर तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का एक पूर्णांक गुणज होता है।
पथ अंतर $\Delta x = n\lambda$,जहाँ $n = 0, 1, 2, 3, \dots$
चूंकि $\lambda$ का पथ अंतर $2\pi$ के कला अंतर के बराबर होता है,इसलिए कला अंतर $\phi$ के संदर्भ में संपोषी व्यतिकरण की शर्त है:
$\phi = 2n\pi$,जहाँ $n = 0, 1, 2, 3, \dots$
इन बिंदुओं पर,परिणामी आयाम अधिकतम $(2a)$ होता है और तीव्रता $I_{max} = (a + a)^2 = 4I_0$ होती है।
विनाशी व्यतिकरण:
विनाशी व्यतिकरण तब होता है जब दो तरंगें $\pi$ (या $\pi$ के विषम गुणज) के कला अंतर से विपरीत कला में होती हैं। यह तब होता है जब पथ अंतर तरंगदैर्ध्य के आधे $(\lambda/2)$ का विषम गुणज होता है।
पथ अंतर $\Delta x = (2n + 1)\frac{\lambda}{2}$,जहाँ $n = 0, 1, 2, 3, \dots$
कला अंतर $\phi$ के संदर्भ में विनाशी व्यतिकरण की शर्त है:
$\phi = (2n + 1)\pi$,जहाँ $n = 0, 1, 2, 3, \dots$
इन बिंदुओं पर,परिणामी आयाम न्यूनतम $(a - a = 0)$ होता है और तीव्रता $I_{min} = 0$ होती है।